बोल के लब आज़ाद हैं तेरे
बोल ज़बाँ अब तक तेरी है
तेरा सुतवाँ जिस्म है तेरा
बोल कि जां अब तक तेरी है
लाई हयात आये, कजा ले चली, चले।
अपनी खुशी न आये, न अपनी खुशी चले।
बेहतर तो है यही कि न दुनिया से दिल लगे।
पर क्या करें जो काम ना बे दिल लगी चले?
दुनिया में किसने राहे फना में दिया है साथ?
तुम भी चले चलो यूँ ही, जब तक चली चले।
freedom लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
freedom लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
शनिवार, नवंबर 19, 2011
सदस्यता लें
संदेश (Atom)