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रविवार, मई 12, 2013

on mother's day

माँ तू अंधेरो मे मुझे रोशनी सी लगती है तुझ से मिलती हु जिन्दगी-२ सी लगती है ..

ऐ अंधेरे देख ले मुंह तेरा काला हो गया, माँ ने आँखें खोल दी घर में उजाला हो गया।

मेरी ख़्वाहिश है कि मैं फिर से फरिश्ता हो जाऊं मां से इस तरह लिपट जाऊँ कि बच्चा हो जाऊँ।

ये ऐसा क़र्ज़ है जो मैं अदा कर ही नहीं सकता, मैं जब तक घर न लौटूं, मेरी माँ सज़दे में रहती है। 

''फिर आना और मेरी कॊख से पैदा होना ...गर मैं बची रही'' (जमीन बोली थी पेड़ से)

सोमवार, मई 09, 2011

माँ - on mother's day

बेसन की सोंधी रोटी पर खट्टी चटनी जैसी माँ
याद आती है चौका बासन चिमटा फुंकनी जैसी माँ
बान की सूनी खांट के ऊपर हर आहट पर कान धरे
आधी सोई आधी जागी थकी दुपहरी जैसी माँ
चिड़िया की चहकार में गूंजें राधा मोहन अली अली
मुर्गे की आवाज़ से उठती घर की कुण्डी जैसी माँ
बीबी बेटी बहिन पड़ोसन थोड़ी थोड़ी सी सबमें
दिन भर एक रस्सी के ऊपर चलती नटनी जैसी माँ
बाँट के अपना चेहरा माथा आँखें जाने कहाँ गयी
फटे पुराने एक एल्बम में चंचल लड़की जैसी माँ