क्यों तू अच्छा लगता है
वक़्त मिला तो सोचेंगे
तुझ में क्या क्या देखा है
वक़्त मिला तो सोचेंगे
सारा शहर शानासाई का दावेदार तो है लेकिन
कौन हमारा अपना है
वक़्त मिला तो सोचेंगे
हमने उसको लिखा था
कुछ मिलने की तदबीर करो
उसने लिखकर भेजा है
वक़्त मिला तो सोचेंगे
मौसम, खुशबू, बादे-सबा, चाँद, शफक और तारों में
कौन तुमारे जैसा है
वक़्त मिला तो सोचेंगे
या तो अपने दिल की मानो
या फिर दुनिया वालों की
वक़्त मिला तो सोचेंगे
क्यों तू अच्छा लगता है
वक़्त मिला तो सोचेंगे
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रविवार, जुलाई 01, 2012
मंगलवार, दिसंबर 27, 2011
ढ़ूंडओगे अगर मुल्कों मुल्कों
By Abida Parween
read in some blog on death anniversary of benajir bhutto
ढ़ूंडओगे अगर मुल्कों मुल्कों
मिलने के नहीं नायाब हैं हम
तबीर है जिसकी हसरत-ए-गम
आए हुमनफासो वो ख्वाब हैं हम
आए दर्द बता कुछ तू ही पता
अब तक यह मु’अम्मया हाल ना हुआ
हम में हैं दिल-ए-बेताब निहान
यह आप दिल-ए-बेताब हैं हम
मैं हैरत-ओ-हसरत का मारा
खामोश खड़ा हूँ साहिल पर
दरिया-ए-मोहब्बत कहता है
“आ कुछ भी नहीं पायाब हैं हम”
लाखों ही मुसाफिर चलते हैं
मंज़िल पोुंचते हैं दो इक
आए आहल-ए-ज़माना क़द्र करो
नायाब ना हों कामयाब हैं हम
मुरघन-ए-क़ाफास को फूलों ने
आए शाद ये कहला भेजा है
आ जाओ जो तुम को आना हो
ऐसे में अभी शादाब हैं हम
Transliteration
Dhoondo Ge Agar Mulkon Mulkon
Milne Ke Nahin Nayaab Hain Hum
Tabeer Hai Jiski Hasrat-0-Gham
Aye Humnafaso Woh Khwaab Hain Hum
Aye Dard Bata Kuch Tu Hi Pata
Ab Tak Yeh Mu’ammya Hal Na Hua
Hum Mein Hain Dil-E-Betaab Nihan
Yah Aap Dil-E-Betaab Hain Hum
Main Hairat-O-Hasrat Ka Maara
Khamosh Khada Hoon Sahil Par
Dariya-E-Mohabbat Kehta Hai
“Aa Kuch Bhi Nahin Payaab Hain Hum”
Lakhon Hi Musafir Chalte Hain
Manzil pohunchte Hain Do Ik
Aye Ahl-E-Zamana Qadr Karo
Nayaab Na Hon Kamyaab Hain Hum
Murghan-E-Qafas Ko Phoolon Ne
Aye Shaad Ye Kahla Bheja Hai
Aa Jao Jo Tum Ko Aana Ho
Aise Mein Abhi Shadaab Hain Hum
Translation
Even if you search from nation to nation
You won’t find me, for I’m an extinct rarity.
O friend! I am that dream which can only be
Interpreted through your desires and grief.
O grief! Now you give me some clue
For this puzzle isn’t solved yet,
Whether a restless heart is concealed within me
Or I myself is a restless heart
I, in a state of awe and regret
Stand quietly at the shore,
The river of love expresses
"come, I'm only a shallow” [rivulet]
Thousand of travellers embark on journey
But only a few of them reach the destination.
O my contemporaries! Revere me for I'm,
If not extinct, a rare [kind of] being.
O Shaad! The flowers have dispatched
This message to the captive birds,
"Come if you so desire
For, at the moment, we're very fresh."
read in some blog on death anniversary of benajir bhutto
ढ़ूंडओगे अगर मुल्कों मुल्कों
मिलने के नहीं नायाब हैं हम
तबीर है जिसकी हसरत-ए-गम
आए हुमनफासो वो ख्वाब हैं हम
आए दर्द बता कुछ तू ही पता
अब तक यह मु’अम्मया हाल ना हुआ
हम में हैं दिल-ए-बेताब निहान
यह आप दिल-ए-बेताब हैं हम
मैं हैरत-ओ-हसरत का मारा
खामोश खड़ा हूँ साहिल पर
दरिया-ए-मोहब्बत कहता है
“आ कुछ भी नहीं पायाब हैं हम”
लाखों ही मुसाफिर चलते हैं
मंज़िल पोुंचते हैं दो इक
आए आहल-ए-ज़माना क़द्र करो
नायाब ना हों कामयाब हैं हम
मुरघन-ए-क़ाफास को फूलों ने
आए शाद ये कहला भेजा है
आ जाओ जो तुम को आना हो
ऐसे में अभी शादाब हैं हम
Transliteration
Dhoondo Ge Agar Mulkon Mulkon
Milne Ke Nahin Nayaab Hain Hum
Tabeer Hai Jiski Hasrat-0-Gham
Aye Humnafaso Woh Khwaab Hain Hum
Aye Dard Bata Kuch Tu Hi Pata
Ab Tak Yeh Mu’ammya Hal Na Hua
Hum Mein Hain Dil-E-Betaab Nihan
Yah Aap Dil-E-Betaab Hain Hum
Main Hairat-O-Hasrat Ka Maara
Khamosh Khada Hoon Sahil Par
Dariya-E-Mohabbat Kehta Hai
“Aa Kuch Bhi Nahin Payaab Hain Hum”
Lakhon Hi Musafir Chalte Hain
Manzil pohunchte Hain Do Ik
Aye Ahl-E-Zamana Qadr Karo
Nayaab Na Hon Kamyaab Hain Hum
Murghan-E-Qafas Ko Phoolon Ne
Aye Shaad Ye Kahla Bheja Hai
Aa Jao Jo Tum Ko Aana Ho
Aise Mein Abhi Shadaab Hain Hum
Translation
Even if you search from nation to nation
You won’t find me, for I’m an extinct rarity.
O friend! I am that dream which can only be
Interpreted through your desires and grief.
O grief! Now you give me some clue
For this puzzle isn’t solved yet,
Whether a restless heart is concealed within me
Or I myself is a restless heart
I, in a state of awe and regret
Stand quietly at the shore,
The river of love expresses
"come, I'm only a shallow” [rivulet]
Thousand of travellers embark on journey
But only a few of them reach the destination.
O my contemporaries! Revere me for I'm,
If not extinct, a rare [kind of] being.
O Shaad! The flowers have dispatched
This message to the captive birds,
"Come if you so desire
For, at the moment, we're very fresh."
गुरुवार, दिसंबर 01, 2011
हम देखेंगे – फैज़ अहमद फैज़
कहते है कि आता है मुसीबत में खुदा याद,
हम पर तो पड़ी वह कि खुदा भी न रहा याद|
हम देखेंगे यह नज्म फैज़ अहमद फैज़ की अन्य नज्मो में बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखती है और यह नज्म पाकिस्तान में इस्बाल बानो द्वारा अपने पुरे शबाब पर गाई गयी है लीजिए पेश है:
हम देखेंगे
लाजिम है के हम भी देखेंगे
वो दिन के जिसका वादा है
जो लौह-ए-अजल में लिक्खा है
हम देखेंगे…
जब जुल्म-ओ-सितम के कोह-ए-गराँ
रुई की तरह उड़ जायेंगे
हम महकूमो के पाँव-तले
जब धरती धड धड धड्केगी
और अहल-ए-हिकम के सर ऊपर
जब बिजली कड-कड कड़केगी
हम देखेंगे…
जब अर्ज-ए-खुदा के काबे से
सब बुत उठवाए जायेंगे
हम अहल-ए-सफा, मर्दूद-ए-हरम
मसनद पे बिठाये जायेंगे
सब ताज उछाले जायेंगे
सब तख़्त गिराए जायेंगे
हम देखेंगे…
बस नाम रहेगा अल्लाह का
जो गायब भी है हाजिर भी
जो मंजर भी है, नाज़िर भी
उट्ठेगा ‘अनल हक़’ का नारा
जो मै भी हू और तुम भी हो
और राज करेगी खल्क-ए-खुदा
जो मै भी हू और तुम भी हो
हम देखेंगे… – फैज़ अहमद फैज़
हम पर तो पड़ी वह कि खुदा भी न रहा याद|
हम देखेंगे यह नज्म फैज़ अहमद फैज़ की अन्य नज्मो में बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखती है और यह नज्म पाकिस्तान में इस्बाल बानो द्वारा अपने पुरे शबाब पर गाई गयी है लीजिए पेश है:
हम देखेंगे
लाजिम है के हम भी देखेंगे
वो दिन के जिसका वादा है
जो लौह-ए-अजल में लिक्खा है
हम देखेंगे…
जब जुल्म-ओ-सितम के कोह-ए-गराँ
रुई की तरह उड़ जायेंगे
हम महकूमो के पाँव-तले
जब धरती धड धड धड्केगी
और अहल-ए-हिकम के सर ऊपर
जब बिजली कड-कड कड़केगी
हम देखेंगे…
जब अर्ज-ए-खुदा के काबे से
सब बुत उठवाए जायेंगे
हम अहल-ए-सफा, मर्दूद-ए-हरम
मसनद पे बिठाये जायेंगे
सब ताज उछाले जायेंगे
सब तख़्त गिराए जायेंगे
हम देखेंगे…
बस नाम रहेगा अल्लाह का
जो गायब भी है हाजिर भी
जो मंजर भी है, नाज़िर भी
उट्ठेगा ‘अनल हक़’ का नारा
जो मै भी हू और तुम भी हो
और राज करेगी खल्क-ए-खुदा
जो मै भी हू और तुम भी हो
हम देखेंगे… – फैज़ अहमद फैज़
गुरुवार, सितंबर 09, 2010
केदार
this is the title of a very good song by a Pakistani rock band called 'noori'. Some interesting facts...
1. these guys are LUMS alums
2. their dad forms part of secular core of PPP has been jailed many times by army, is an exponent of indian classical music, running a music school with very indic name and has even invented an instrument called 'sagar vina'
3. their songs have indic motive e.g. this song which is another name of siva but chaps have got talent if India was undivided they would have been really famous..
आ आअ आअ आ
आ आअ आअ आ
छीन गया तेरे दिल का चैन अब
(अब) छाई केदार और भीगे तेरे नैना
लूट गयी तेरे मान की आस
गुम सुम उदास ये रोग तो है सहना
सपना सज़ा के, सब से पा के
डोर समंदर आग भड़के है
जग से ओझल, मंन के अंदर
हर किनारे ढ़ूनडते फिरे
वो हीरे मोती, हम को मिल जाएँ
कुछ तोड़ के आए, कुछ जोड़ के आए
हम आग के पांच्ची
अब दे चुके, वो इंतेहाँ
दिल पर सहे जिन के निशान
डोर, जल रहा मकान
निकला अभी, ये कारवाँ
धूम छा, धूम छा...(4)
ढल जाएगी ये गुम की रात
बरसेंगे मोती, फूल भी खिलेंगे
चीन गये जो थे चिराग
हम जूसतुजू मैं और भी ... गे
कल को जगाने, ये दीवाने
रोशनी (ले) कर चलेंगे
मन के अंदर, आसमान को
हर दिशा में ढूनडते फिरे वो!
(वो) हीरे मोटी, हम को मिल जाएँ
सब छोड़ के आए, सब तोड़ के आए
हम आग के पंछी!!
हम दे चुके, वो इंतेहाँ
दिल पर सहे, जिन के निशान
दूर, जल रहा मकान
निकला अभी, ये कारवाँ!
रुकता नहीं, ये कारवाँ!!
धूम तारा देने ना, देने ना, देने ना..(4)
... .... ... जहाँ
राख वो, नये मकान
जिन की है, तलाश वो
(धूल) गये, सब वो निशान
धीं ताना, देने नाना, देने ना...(10-14)
हमारे संग चले
जैसे जोगी बने
हमारे संग चले अब ये...!
हम छोड़ के आए, अब तोड़ के आए!
हम आग के पंचिी
हम दे चुके, वो इंतेहाँ
दिल पर सहे, जिन के निशान
डोर, जल रहा मकान
निकला अभी, ये कारवाँ!
रुकता नहीं, ये कारवाँ!!
हम दे चुका, वो इंतेहाँ
दिल पर सजे, जिन के निशान
दूउर, जल रहा मकान
निकला अभी, ये कारवाँ!
रुकता नहीं, ये कारवाँ!!
1. these guys are LUMS alums
2. their dad forms part of secular core of PPP has been jailed many times by army, is an exponent of indian classical music, running a music school with very indic name and has even invented an instrument called 'sagar vina'
3. their songs have indic motive e.g. this song which is another name of siva but chaps have got talent if India was undivided they would have been really famous..
आ आअ आअ आ
आ आअ आअ आ
छीन गया तेरे दिल का चैन अब
(अब) छाई केदार और भीगे तेरे नैना
लूट गयी तेरे मान की आस
गुम सुम उदास ये रोग तो है सहना
सपना सज़ा के, सब से पा के
डोर समंदर आग भड़के है
जग से ओझल, मंन के अंदर
हर किनारे ढ़ूनडते फिरे
वो हीरे मोती, हम को मिल जाएँ
कुछ तोड़ के आए, कुछ जोड़ के आए
हम आग के पांच्ची
अब दे चुके, वो इंतेहाँ
दिल पर सहे जिन के निशान
डोर, जल रहा मकान
निकला अभी, ये कारवाँ
धूम छा, धूम छा...(4)
ढल जाएगी ये गुम की रात
बरसेंगे मोती, फूल भी खिलेंगे
चीन गये जो थे चिराग
हम जूसतुजू मैं और भी ... गे
कल को जगाने, ये दीवाने
रोशनी (ले) कर चलेंगे
मन के अंदर, आसमान को
हर दिशा में ढूनडते फिरे वो!
(वो) हीरे मोटी, हम को मिल जाएँ
सब छोड़ के आए, सब तोड़ के आए
हम आग के पंछी!!
हम दे चुके, वो इंतेहाँ
दिल पर सहे, जिन के निशान
दूर, जल रहा मकान
निकला अभी, ये कारवाँ!
रुकता नहीं, ये कारवाँ!!
धूम तारा देने ना, देने ना, देने ना..(4)
... .... ... जहाँ
राख वो, नये मकान
जिन की है, तलाश वो
(धूल) गये, सब वो निशान
धीं ताना, देने नाना, देने ना...(10-14)
हमारे संग चले
जैसे जोगी बने
हमारे संग चले अब ये...!
हम छोड़ के आए, अब तोड़ के आए!
हम आग के पंचिी
हम दे चुके, वो इंतेहाँ
दिल पर सहे, जिन के निशान
डोर, जल रहा मकान
निकला अभी, ये कारवाँ!
रुकता नहीं, ये कारवाँ!!
हम दे चुका, वो इंतेहाँ
दिल पर सजे, जिन के निशान
दूउर, जल रहा मकान
निकला अभी, ये कारवाँ!
रुकता नहीं, ये कारवाँ!!
लेबल:
coke studio,
hindu culture,
music,
pakistan
मंगलवार, अगस्त 31, 2010
हुस्न ए हक़ीक़ी – beauty of truth
ऐ हुस्ने हक़ीक़ी नूर ए अzअल
तेनू वाजिब ते इमकान कहूँ
तेनू खालिक ज़ात क़दीम कहूँ
तेनू हदीस खल्क़ जहाँ कहूँ
तेनू मुतलक़ महज़ वजूद कहूँ
तेनू ऑल्मिया अयान कहूँ
आवाह नफूस अक़ूल कहूँ
अश्बा इयान नेहान कहूँ
तेनू आइन हक़ीक़त माहीयत
तेनू अर्ज़ सिफ़त ते शान कहूँ
अनवाह कहूँ औज़ाह कहूँ
अतवार कहूँ औज़ान कहूँ
तेनू अर्श कहूँ अफलाक कहूँ
तेनू नाज़ नईम जानां कहूँ
तेनू तट जमाड नबाट कहूँ
हैवान कहूँ इंसान कहूँ
तेनू मस्जिद मंदिर दार कहूँ
तेनू पोथि ते क़ुरान कहूँ
तसबीह कहूँ ज़ुननार कहूँ
तेनू कुफ्र कहूँ ईमान कहूँ
तेनू बादल बरखा गाज कहूँ
तेनू बिजली ते बरान कहूँ
तेनू आब कहूँ कहूँ तेनू खाक कहूँ
तेनू बाद कहूँ नीरान कहूँ
तेनू दसरत लीचमान राम कहूँ
तेनू सीता जी ज़ानां कहूँ
बलदेव जसुदा नंद कहूँ
तेनू किशन कन्हैया कान कहूँ
तेनू बार्ह्मा बिशन गणेश कहूँ
महादेव कहूँ भगवान कहूँ
टेनी गीत ग्रंथ ते बेद कहूँ
तेनू ग्यान कहूँ अग्यान कहूँ
तेनू इब्राहिम हवा शीस कहूँ
तेनू नूह कहूँ तूफान कहूँ
तेनू इब्राहिम ख़लील कहूँ
तेनू मूसा बिन इमरान कहूँ
तेनू हर दिल दा दिलदार कहूँ
तेनू अहमद आलीशान कहूँ
तेनू शाहिद मल्क हिजाज़ कहूँ
तेनू बाइस कौन मकान कहूँ
तेनू नाज़ कहूँ अंदाज़ कहूँ
तेनू हूर पारी गील्मान कहूँ
तेनू नौक कहूँ तेनू त्तौक कहूँ
तेनू सुर्खी बीधा पान कहूँ
तेनू तबला ते तम्बूर कहूँ
तेनू ढोलक सुर्र ते तान कहूँ
तेनू हुस्न ते हार सिन्घार कहूँ
तेनू अश्वा घमzअ आन कहूँ
तेनू इश्क़ कहूँ तेनू इल्म कहूँ
तेनू वेहेम यक़ीन गुमान कहूँ
तेनू हुस्न कवि इद्राक कहूँ
तेनू ज़ौक कहूँ वज्दान कहूँ
तेनू साकार कहूँ सकरान कहूँ
तेनू हैरत ते हैरान कहूँ
तसलीम कहूँ तल्वीन कहूँ
टमकीन कहूँ इरफ़ान कहूँ
तेनू सुंबल सोसन सर्व कहूँ
तेनू नरगिस नाफ़रमान कहूँ
तेनू लाले दाघ ते बाघ कहूँ
गुलज़ार कहूँ बुस्तान कहूँ
तेनू खंजर तीर तूफांग कहूँ
तेनू बरछा बांक सनान कहूँ
तेनू तीर खिदंग कमान कहूँ
सूफार कहूँ पीकान कहूँ
बेरंग कहूँ बेमिसाल कहूँ
बेसूरत हर हर आन कहूँ
सुबह कहूँ क़ुदूस कहूँ
रहमान कहूँ सुभान कहूँ
कर तौबा टार्ट फरीद सदा
हर शह नू पर नुकसान कहूँ
तेनू पाक अलख बे ऐब कहूँ
तेनू हक़ बे नाम निशान कहूँ
हुस्न ए हक़ीक़ी – ब्यूटी ऑफ ट्रूथ
ख्वाजा गुलाम फरीद (1841 – 1901)
तेनू वाजिब ते इमकान कहूँ
तेनू खालिक ज़ात क़दीम कहूँ
तेनू हदीस खल्क़ जहाँ कहूँ
तेनू मुतलक़ महज़ वजूद कहूँ
तेनू ऑल्मिया अयान कहूँ
आवाह नफूस अक़ूल कहूँ
अश्बा इयान नेहान कहूँ
तेनू आइन हक़ीक़त माहीयत
तेनू अर्ज़ सिफ़त ते शान कहूँ
अनवाह कहूँ औज़ाह कहूँ
अतवार कहूँ औज़ान कहूँ
तेनू अर्श कहूँ अफलाक कहूँ
तेनू नाज़ नईम जानां कहूँ
तेनू तट जमाड नबाट कहूँ
हैवान कहूँ इंसान कहूँ
तेनू मस्जिद मंदिर दार कहूँ
तेनू पोथि ते क़ुरान कहूँ
तसबीह कहूँ ज़ुननार कहूँ
तेनू कुफ्र कहूँ ईमान कहूँ
तेनू बादल बरखा गाज कहूँ
तेनू बिजली ते बरान कहूँ
तेनू आब कहूँ कहूँ तेनू खाक कहूँ
तेनू बाद कहूँ नीरान कहूँ
तेनू दसरत लीचमान राम कहूँ
तेनू सीता जी ज़ानां कहूँ
बलदेव जसुदा नंद कहूँ
तेनू किशन कन्हैया कान कहूँ
तेनू बार्ह्मा बिशन गणेश कहूँ
महादेव कहूँ भगवान कहूँ
टेनी गीत ग्रंथ ते बेद कहूँ
तेनू ग्यान कहूँ अग्यान कहूँ
तेनू इब्राहिम हवा शीस कहूँ
तेनू नूह कहूँ तूफान कहूँ
तेनू इब्राहिम ख़लील कहूँ
तेनू मूसा बिन इमरान कहूँ
तेनू हर दिल दा दिलदार कहूँ
तेनू अहमद आलीशान कहूँ
तेनू शाहिद मल्क हिजाज़ कहूँ
तेनू बाइस कौन मकान कहूँ
तेनू नाज़ कहूँ अंदाज़ कहूँ
तेनू हूर पारी गील्मान कहूँ
तेनू नौक कहूँ तेनू त्तौक कहूँ
तेनू सुर्खी बीधा पान कहूँ
तेनू तबला ते तम्बूर कहूँ
तेनू ढोलक सुर्र ते तान कहूँ
तेनू हुस्न ते हार सिन्घार कहूँ
तेनू अश्वा घमzअ आन कहूँ
तेनू इश्क़ कहूँ तेनू इल्म कहूँ
तेनू वेहेम यक़ीन गुमान कहूँ
तेनू हुस्न कवि इद्राक कहूँ
तेनू ज़ौक कहूँ वज्दान कहूँ
तेनू साकार कहूँ सकरान कहूँ
तेनू हैरत ते हैरान कहूँ
तसलीम कहूँ तल्वीन कहूँ
टमकीन कहूँ इरफ़ान कहूँ
तेनू सुंबल सोसन सर्व कहूँ
तेनू नरगिस नाफ़रमान कहूँ
तेनू लाले दाघ ते बाघ कहूँ
गुलज़ार कहूँ बुस्तान कहूँ
तेनू खंजर तीर तूफांग कहूँ
तेनू बरछा बांक सनान कहूँ
तेनू तीर खिदंग कमान कहूँ
सूफार कहूँ पीकान कहूँ
बेरंग कहूँ बेमिसाल कहूँ
बेसूरत हर हर आन कहूँ
सुबह कहूँ क़ुदूस कहूँ
रहमान कहूँ सुभान कहूँ
कर तौबा टार्ट फरीद सदा
हर शह नू पर नुकसान कहूँ
तेनू पाक अलख बे ऐब कहूँ
तेनू हक़ बे नाम निशान कहूँ
हुस्न ए हक़ीक़ी – ब्यूटी ऑफ ट्रूथ
ख्वाजा गुलाम फरीद (1841 – 1901)
गुरुवार, अगस्त 19, 2010
In love with Zeb and Haniya
Artists like these and songs like this make you wish for a united india and are also a fitting reply to Taliban types (both are pashtun girls)
तेरी बातों ने दिल तोड़ा
तूने देखा और मुँह मोड़ा
बादल गरजा तोड़ा तोड़ा
तेरी बातों ने दिल तोड़ा
तूने देखा और मुँह मोड़ा
बादल गरजा थोड़ा थोड़ा
पानी बरसा
ये दिल तरसा
पर जब बीता तोड़ा अरसा
मैने रोना छोड़ दिया
गुज़रे थे जिन्से रास्ते
वोही अंजान आहें बन गईं
करनी थी जिससे बात उंकही
शायद चुप ही है सही
हलचल मैं है सागर सभी
साकीं है कुछ जुंबिश नही
यूँही है गुज़रे है ज़िंदगी
जीते कोई कोई
अब तो मैं बस एक भंवर हूँ
गर्दिश मैं हूँ रहगुज़ार हूँ
तूफान हूँ मैं तेरा दर हूँ
चल पड़ी है कल की खोई
हिम्मत है तो रोके कोई
मैने रोना छोड़ दिया
गिरते पत्तों ने
आस है भारी
कल ना आएगी कभी
बांधो ढारस अब
वक़्त है यही
कर गुज़रो सब कुछ अभी
गर्दिश मैं है मौसम सभी
ठहरी नही रोके नही
रस्म-ए-दुनिया है तो यही
पहुँचें कोई कोई
तेरी बातों ने दिल तोड़ा
तूने देखा और मुँह मोड़ा
बादल गरजा थोड़ा थोड़ा
पानी बरसा
ये दिल तरसा
पर जब बीता तोड़ा अरसा
मैने रोना छोड़ दिया
मैने रोना छोड़ दिया
मैने रोना रोना रोना रोना रोना छोड़ दिया
तेरी बातों ने दिल तोड़ा
तूने देखा और मुँह मोड़ा
बादल गरजा तोड़ा तोड़ा
तेरी बातों ने दिल तोड़ा
तूने देखा और मुँह मोड़ा
बादल गरजा थोड़ा थोड़ा
पानी बरसा
ये दिल तरसा
पर जब बीता तोड़ा अरसा
मैने रोना छोड़ दिया
गुज़रे थे जिन्से रास्ते
वोही अंजान आहें बन गईं
करनी थी जिससे बात उंकही
शायद चुप ही है सही
हलचल मैं है सागर सभी
साकीं है कुछ जुंबिश नही
यूँही है गुज़रे है ज़िंदगी
जीते कोई कोई
अब तो मैं बस एक भंवर हूँ
गर्दिश मैं हूँ रहगुज़ार हूँ
तूफान हूँ मैं तेरा दर हूँ
चल पड़ी है कल की खोई
हिम्मत है तो रोके कोई
मैने रोना छोड़ दिया
गिरते पत्तों ने
आस है भारी
कल ना आएगी कभी
बांधो ढारस अब
वक़्त है यही
कर गुज़रो सब कुछ अभी
गर्दिश मैं है मौसम सभी
ठहरी नही रोके नही
रस्म-ए-दुनिया है तो यही
पहुँचें कोई कोई
तेरी बातों ने दिल तोड़ा
तूने देखा और मुँह मोड़ा
बादल गरजा थोड़ा थोड़ा
पानी बरसा
ये दिल तरसा
पर जब बीता तोड़ा अरसा
मैने रोना छोड़ दिया
मैने रोना छोड़ दिया
मैने रोना रोना रोना रोना रोना छोड़ दिया
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